तोड़कर चट्टान फूटे सैकड़ों झरने
टेसुओं में खिल गये दहके हुए अंगार
फिर उठे सोए समन्दर में महकती खुशबुओं के ज्वार
रंग उभरी कल्पनाओं में
घुल गया चन्दन हवाओं में
मिल गईं बेहोशियाँ आकर
होश की सारी दवाओं में
भावनाओं की उठी जयमाल के आगे
आज संयम सिर झुकाने को हुआ लाचार।
छू लिया जो रेशमी पल ने
बिजलियाँ जल में लगीं जलने
प्रश्न सारे कर दिए झूठे
दो गुलाबों के लिखे हल ने
तितलियों ने आज मौसम के इशारे पर
फूल की हर पाखुड़ी का कर दिया श्रृंगार।
लड़खड़ाई सांस की सरगम
गुनगुनाकर गीतगोविन्दम्
झिलमिलाकर झील के जल में
और उजली हो गई पूनम
रंग डाला फिर हठीले श्याम ने आकर
राधिका का हर बहाना हो गया बेकार।


वाह...छू लिया जो रेशमी पल ने
ReplyDeleteबिजलियाँ जल में लगीं जलने
बहुत ही सुंदर भाव और शब्दों का अनूठा प्रयोग
Dr.ji aap kya khoob likhti hain.
ReplyDeletegreat mam keep it up and up it was very nice that u r promoting hindi in web based applications
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